Hardware

Computer Hardware 

Computer Hardware Computer का वह भाग होता है जिसे हम छू सकते हैं और की लम्बाई चौड़ाई को माप सकते हैं और जिसका कोई भौतिक स्वरूप होता है वह Computer Hardware कहलाता है Computer Hardware निम्नलिखित 5 भागों से मिलकर बना होता है 
  1. CPU ( Central Processing Unit )
  2. Monitor
  3. Keyboard 
  4. Mouse 
  5. UPS ( Universal Power Supply or Uninterrupted Power Supply )

Central Processing Unit :

CPU जिसे हम Computer का Brain ( मस्तिष्क ) कहते हैं एक प्रकार की Processing Device है जो user द्वारा Input किये गये Data को Precess करके उसका परिणाम देती है।
CPU बिल्कुल एक इंसानी दिमाग की तरह काम करता है जैसे दिमाग के बिना हम कुछ नही कर सकते वैसे ही Computer या कोई भी उपकरण ( Gadgets ) CPU के बिना कोई भी कार्य नही कर सकता है Computer जो भी कार्य करता है उसमें CPU का महत्वपूर्ण योगदान है CPU को Micro Processor भी कहते हैं Micro Processor बनाने वाली दी कंपनियां Top Level पर हैं ।
  1. Intel (Mits Company)
  2. AMD ( Advance Micro Device )

Intel Processor :

Intel 386 , Intel 486 , Intel 586 , Pentium I , Pentium II , Pentium III Intel Core Duo , Intel Core Quard , Intel Core i3 , Intel Core i5 , Intel Core i7

AMD Processor :

AMD Ryzen 5 , AMD Ryzen 7

Parts of CPU  :

CPU के पाँच भाग होते हैं ।
  1. CU    -     Control Unit 
  2. ALU  -    Arithmetic Logic Unit 
  3. Memory 
  4. Input Unit 
  5. Output Unit 

CU ( Control Unit ) : 

Control Unit Central Processing Unit CPU का एक मुख्य घटक होता है इसे नियंत्रण इकाई भी कहते हैं संक्षिप्त में इसे CU कहा जाता है 

Functions of CU ( Control Unit ) :

CU Computer Systems की सारी Processing की प्रक्रिया को Control करता है Control Unit यह भी तय करता है कि Input Device को Data कहा से लेना है उसको Storage Device में कब डालना है ALU को एक बार Data कब लेना है और उस Data को क्या करना है और अन्तिम परिणाम को Output Device तक कैसे भेजना है यह सारे कार्य Computer Systems के CU  (Control Unit ) से ही सम्भव होते हैं Control Unit पूरे Computer Systems की कार्य प्रणाली को नियंत करने का काम करता है ।

ALU ( Arithmetic Logic Unit  ) :

Arithmetic Logic Unit Central Processing Unit के तीन मुख्य घटकों में से एक है जिसमें Memory और Control Unit भी शामिल हैं ALU Computer Hardware में  एक Digital Circuit होता है ।
Arithmetic Logic Unit का मुख्य कार्य होता है अंक गणितीय कार्य करना जैसे Addition,  Subtraction, Multiplication,  Division  करना और इसके अतिरिक्त तर्क सम्बंधित कार्य जितने भी होते हैं तुलना करना चयन करना मिलान करना Data को आपस में Merge करना इस प्रकार के कार्य Arithmetic Logic Unit (ALU) करता है ALU को मुख्यरूप से Basic Arithmetic Operations के लिये ही Design किया गया है।

Memory  :

Memory Computer में Data Store  करने के लिये प्रयोग में लाये जाने वाला एक  Hardware Electronic Component होता है जिसमें Computer का Data Store होता है Computer के CPU में प्रयोग की जाने वाली Memory को Cache Memory कहते हैं ।
RAM तथा CPU के Resister के मध्य  Data Transfer CPU के द्वारा किये जाने वाले सभी कार्यों में सबसे अधिक समय लेने वाला कार्य होता है इसका कारण यह है कि CPU की अपेक्षा RAM की Speed Slow होती है इस समस्या के समाधान के लिये Cache Memory को CPU में लगाया जाता है Cache Memory तथा RAM लगभग समान होते हैं किन्तु Cache Memory साधारण Memory की अपेक्षा अत्यन्त तेज होती है Memory दो प्रकार की होती है।
  1. RAM  - Random Access Memory 
  2. ROM  - Read Only Memory 

Input Unit  : 

Computer Systems के CPU में Input Unit वह होता है जिसके द्वारा हम Computer को Data और निर्देश ( Command) देते हैं ।

Keyboard :

Keyboard Computer System का महत्वपूर्ण भाग होता है यह Computer में Text और Character input करने के लिए Design किया गया है भौतिक रूप से Computer का Keyboard आयताकार होता है इसमें लगभग 104 Keys होती हैं। जैसे अक्षर ( Alphabet ) संख्या ( Numbers ) चिन्ह ( Symbol  ) Function Keys  Arrow key व कुछ विषेश प्रकार की Keys भी होती हैं ।
"Keyboard को HID Device ( Human Interface Device ) भी कहते है जिसके द्वारा User Computer को data और Command देता है । Human द्वारा Use किये जाने के कारण ही इसे HID ( Human Interface Device) कहते हैं ।"

Types of Keyboard Keys :

हम Keyboard की संरचना के आधार पर इसकी Keys  को 8 भागों में बाँट सकते हैं ।
  1. Alphanumeric Keys 
  2. Numeric Keypad 
  3. Function Keys 
  4. Special Purpose Keys 
  5. Modifier Keys 
  6. Cursor Keys 
  7. Multimedia Keys 
  8. Internet Keys 

Alphanumeric Keys  :

Alphanumeric Keys Keyboard के केन्द्र में स्थित होती है  Alphanumeric Keys में Alphabets (A - Z), Numbers ( 0 - 9 ), Symbol ( @, #,$,%,^,*,&, +, !,= ) होते हैं । इस खण्ड में अंकों चिन्हों तथा वर्णमाला के अतिरिक्त चार Keys Tab, Capslock, Backspace तथा Enter कुछ विशिष्ट कार्यों के लिए होती है ।

Numeric Keypad : 

Numeric Keypad Keyboard के दाहिने तरफ होता है Numeric Keypad में लगभग 17 Keys होती है जिसमें 0 - 9 तक के अंक Mathematical Operators +, - , *, / तथा Enter key होती है।

Function Keys:

Keyboard के सबसे ऊपर 12 Function Keys होती हैं । जो F1 F2..............F12 तक होती ये Keys Commands को Shortcut के रूप में प्रयोग करने में सहायक होती है इन Keys के  कार्य Software के अनुरूप बदलते रहते हैं ।

Special Purpose Keys :

ये Keys कुछ विशेष कार्यों को करने के लिए प्रयोग की जाती है जैसे Sleep, Power,  Volume,  Start, Shortcut,  Esc, Tab, Insert, Home, End, Delete etc. ये कुन्जियाँ नये Operating System के कुछ विशेष कार्यों के अनुरूप होती है।

Modifier Keys  :

इसमें तीन कुन्जियाँ होती हैं जिनके नाम SHIFT, ALT, CTRL है इनको अकेला दबाने से कोई खास प्रयोग नही होगा परन्तु जब अन्य कुंजी के साथ इसका प्रयोग होता है तो ये उन कुन्जियों के Input को बदल देती हैं इसलिए ये Modifier Keys कहलाती हैं ।

Cursor Keys  :

ये चार प्रकार की Keys होती हैं Up, Down,  Left and Right Arrow Keys इनका प्रयोग Cursor को Screen पर Move व नियन्त्रित करने के लिए किया जाता है।

Multimedia Keys :

Next, Previous, Stop, Pause, Mute, Volume +, Volume - etc.

Internet Keys :

Home, Search, Web, Go - To आदि Internet Keys कहलाती हैं इनका प्रयोग Internet चलाते समय ज्यादा किया जाता है।

Types of Keyboard  :

मुख्यतः Keyboard तीन प्रकार का होता है परंतु एक और प्रकार का Software Based Keyboard भी होता है। जिसे Virtual Keyboard कहते हैं ।
  1. Normal Keyboard or Wired Keyboard 
  2. Wireless Keyboard 
  3. Ergonomic Keyboard 
  4. Virtual Keyboard 

Normal Keyboard or Wired Keyboard :

साधारण Keyboard एसे Keyboard होते हैं जो सामान्य रूप से प्रयोग किये जाते हैं जिसे User अपने PC में USB Cable के द्वारा USB Port से Connect करके प्रयोग करता है इसका आकार आयताकार होता है इसमें लगभग 104 - 108 Keys होती हैं इसे Computer से Connect करने के लिये एक USB Cable होती है जिसके द्वारा इसे CPU से जोड़ा जाता है।

Wireless Keyboard  :

Wireless Keyboard users को Keyboard में Wire के प्रयोग से छुटकारा दिलाता है यह Keyboard सीमित दूरी तक कार्य करता है । यह Wireless Keyboard थोड़ा मँहगा होता है तथा इसमें थोड़ी तकनीक जटिलता होती है। इसमें तकनीक जटिलता होने के कारण इसका प्रचलन बहुत अधिक नही हो पाया है।

Ergonomic Keyboard  :

बहुत सारी Companies एक खास प्रकार के Keyboard का निर्माण किया है जो User को Typing करने में दूसरे Keyboard  की अपेक्षा आराम देता है एसे Keyboard  Ergonomic Keyboard  कहलाते हैं ऐसे Keyboard तौर पर User की कार्यक्षमता बढाने के साथ - साथ लगातार Typing करने के कारण उत्पन्न होने वाले कलाई के दर्द को कम करने में सहायता देता है।

Virtual Keyboard  :

Virtual Keyboard जिसे On Screen Keyboard के नाम से जाना जाता है यह एक Software Based Non Physical Keyboard जो High Level Language  C , C++ जैसी Language के द्वारा बनाया जाता है जिस पर Physical  Keyboard  जैसे Buttons होते हैं । जिनको Mouse के द्वारा या Touch Screen Display में Touch करके Use किया जाता है ।

Mouse  :

Mouse का आविष्कार सन् 1968 में Douglas Carl Engelbart ने किया था वर्तमान समय में Personal Computer में निर्देशों को प्रविष्ट करने का सबसे प्रचलित मध्याम Mouse है इसकी आकृति चूहे के सामन होती है इसमें कुल तीन बटन होते हैं इसका प्रयोग GUI ( Graphical User Interface ) में किया जाता है। यह Computer Screen पर एक तीर को नियन्त्रित करता है इसलिए इसे Pointing Device कहते हैं Mouse में  बटन दबाने की क्रिया को Click करना कहते है Mouse तीन प्रकार के होते हैं ।
  1. Mechanical Mouse 
  2. Optical Mouse 
  3. Wireless or Cardless Mouse 

Mechanical Mouse  :

इस Mouse का प्रयोग 1990 के दशक में किया जाता इसमें एक रबड़ की गेंद लगी होती है जो Mouse के खोल Cover से थोड़ी बाहर निकली रहती है इस रबड़ की गेंद को घुमाकर Pointer को नियन्त्रित किया जाता है।

Optical Mouse  :

इसमें रबड़ गेंद के स्थान पर Laser beem होती है इसकी सतह से लाईट की एक Beem निकलती है जो सतह से टकराने पर परावर्तित होती है जिससे Mouse Pointer screen पर घूमता है ।

Wireless Mouse or Cordless Mouse  :

इस प्रकार का Mouse Radio Frequency Technique की सहयता से कार्य करता है। इसमें दो मुख्य यन्त्र होते हैं Transmeter and Receiver,  Transmeter Mouse में लगा होता है।और Receiver को CPU में लगाते हैं । Transmeter से Signal प्रेषित किये जाते हैं और Receiver उसे प्राप्त करता है ।

Pointing  : 

जब Mouse  को इधर-उधर खिसकाकर Mouse  Pointer को अपने desktop के किसी Icon पर लाते है तो इसे Pointing करना कहा जाता है ।

Clicking  : 

जब Mouse Pointer को किसी Icon या Program पर ला कर Mouse के बाएँ Button को एक बार दबा कर छोड़ देते हैं तो उस क्रिया को Click करना कहा जाता है।

Double Click : 

जब Mouse के बाएँ Button से जल्दी-जल्दी दो बार Click करते हैं तो उस क्रिया को Double Clicking कहा जाता है।

Right Clicking  :

जब Mouse Pointer को किसी Icon या Program पर ला कर Mouse के दायें Button को Click करते हैं तो यह क्रिया Right Click करना कहलाती है ।

Dragging  :

जब Pointer  को किसी Icon पर ला कर Mouse के बाएँ Button को दबाये रख कर ही Mouse Pointer को इधर-उधर सरकाते हैं तो इस क्रिया को खीचना Dragg करना कहा जाता है।

Output Unit :

Computer CPU के Output Unit के माध्यम से परिणाम को Output Devices पर प्राप्त करते हैं ।

Monitor  :

Monitor को Visual Display Unit कहते हैं यह एक प्रकार का सयंत्र होता है जो TV. जैसे Screen पर  Output को प्रदर्शित करता है Monitor को सामान्यतः उनके प्रदर्शित रंगों के आधार पर निम्न प्रकार से Classified किया जाता हैं 
  1. Monochrome Monitor 
  2. Gray Scale Monitor 
  3. Color Monitor 
  4. Flat Panel Monitor 

Monochrome Monitor  :

Monochrome दो शब्दों ( Mono ) अर्थात एकल (single) तथा (Chrome) अर्थात रंग (Color) से मिलकर बना है इसलिए इसे Single Color Display कहते हैं तथा यह Monitor Output को Black & White में प्रदर्शित (  Display  ) करता है ।

Gray Scale Monitor  :

यह Monitor Monochrome जैसे ही होते हैं लेकिन यह किसी भी तरह के Display को Gray Scale में प्रदर्शित करता है इस प्रकार के Monitor अधिकता Handy Computer जैसे Laptop में प्रयोग किये जाते हैं ।

Color Monitors  :

ऐसा Monitor RGB ( Red, Green,  Blue) विकिरणों के समायोजन के रूप में Output को प्रदर्शित करता है ऐसे Monitor High Resolution में Graphics को प्रदर्शित करने में सक्षम होते हैं Computer Memory की क्षमता के ऐसे Monitor 16 से लेकर 16 लाख तक के रंगों में Output प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं ।

Types of Monitor  :

Monitor निम्नलिखित प्रकार के होते हैं ।
  • CRT Monitor 
  • Flat Panel Monitor 
  • LCD (Liquid Crystal Display)
  • LED (Light Emitting Diode)

CRT Monitor  :

CRT Monitor Computer Systems में प्रयोग होने वाला Output Device है जिसे VDU (Visual Display Unit) भी कहा जाता है इसका मुख्य भाग Cathode Ray Tube होता है जिसे Generally Picture Tube कहते हैं यह Tube CRT कहलाती है CRT तकनीक सस्ती और उत्तम श्रेंणी में Output प्रदान करती है CRT Monitor में  Electron Gun होता है जो की Electrons की Beam और Cathode Ray को उत्सर्जित करती है ये Electron Beam Electronic grid से पास की जाती हैं ताकी Electron की गति कम किया जा सके CRT Monitor की Screen पर Phosphorus की Coating की जाती है इसलिए जैसे ही Electron Beam Screen से टकराती तो Pixels चमकने लगते हैं और Screen पर Images या Text दिखाई देता है ।

Flat Panel Monitor  :

CRT Technology के स्थान पर यह Technology विकसित की गई जिसमें Chemical एवं गैसों को एक Plate में रख कर उसका प्रयोग Display में किया जाता है यह बहुत पतली Screen होती है Flat Panel Display हल्की तथा बिजली की कम खपत करने वाली Display होती है इसमें Liquid Crystal Display ( LCD ) Technology प्रयोग की जाती है LCD में CRT Technique की आपेक्षा कम स्पष्टता होती है इनका प्रयोग Laptop आदि में किया जाता है।

LCD (Liquid Crystal Display) :

CRT Monitor बिल्कुल Television की तरह हुआ करते थे । Technology के विकास के साथ Monitor भी अपने रूप बदले और आज CRT Monitor के स्थान पर LCD Monitor प्रचलन में आ गये । यह Monitor बहुत ही आकर्षित होते हैं Liquid Crystal Display को LCD के नाम से भी जाना है । यह Digital Technology है जो एक Flat सतह पर तरल Crystal के माध्यम से आकृति बनाता है यह कम जगह और कम Electricity Power का प्रयोग करता है तथा Cathode Ray Tube की आपेक्षा कम Heat होता है यह Display पहले Laptop में प्रयोग होता था लेकिन अब यह Screen Desktop Computer के लिये भी प्रयोग हो रहा है।

LED ( Light Emitting Diode)  :

LED Monitor बाजार में Monitor के नवीनतम प्रकार हैं ये Flat Panel होते हैं या थोड़े घुमावदार Display जो Backlighting के लिये Cold Cathode Florescent (CCFL) के बजाय Backlighting के लिए Light Emitting Diode का उपयोग करते है LED Monitor CRT और LCD की तुलना में बहुत कम बिजली का उपयोग करते हैं LED Monitor High Contrast वाले Images का उत्पादन करते हैं और इसमें CRT या LCD Monitor से अधिक टिकाऊ होते हैं और इसमें बहुत पतली Design होती है चलते समय ये बहुत गर्मी उत्पन्न नही करते हैं LED Monitor अधिक महँगे होते हैं ।

Characteristics of Monitor  :

Monitor के मुख्य लक्षण Resolution, Refresh Rate, Dot Pitch, Interlacing  or Non Interlacing Bit Mapping आदि है जिनके आधार पर इनकी गुणवत्ता को परखा जाता है ।

Resolution  :

Monitor का महत्वपूर्ण गुण Resolution Screen के Picture की स्पष्टता और Sharpness को बताता है अधिकतर Display Devices में Image Screen के छोटे-छोटे Dots के चमकने से बनते हैं Screen पर छोटे-छोटे Dots ( Pixels) कहलाते हैं Pixel शब्द Picture Element का संक्षिप्त रूप है Screen पर जितने अधिक Pixel होंगे Screen का Resolution भी उतना ही अधिक होगा अर्थात Image उतना ही स्पष्ट ( Sharp ) होगा एक Display Resolution माना 640*480 है तो इसका अर्थ है कि Screen पर 640 dots के Column और 480 Dots की Row से बना है

Refresh Rate  :

Monitor लगातार कार्य करता रहता है Computer Screen पर Image दायें से बायें एवं ऊपर से नीचे बनती मिटती रहती है जो Electron Gun से व्यवस्थित होते रहते हैं इसका अनुभव हम तभी कर पाते हैं जब Screen पर Click करते हैं या फिर जब Screen Refresh Rate कम होता है।

Dot Pitch :

Dot pitch  एक प्रकार की मापन तकनीक है जो यह प्रदर्शित करती है कि दो Pixel के मध्य Horizontal Difference या दूरी कितनी है इसका मापन मिलिमीटर में किया जाता है यह Monitor कि गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है Monitor में Dot Pitch कम होना चाहिए। Colour Monitor की Dot Pitch 0.15mm से 0.30mm तक होती है ।

Interlacing or Non Interlacing :

यह एक ऐसी Display तकनीक है जो कि Monitor में Resolution की गुणवत्ता में और अधिक वृद्घि करती है Interlacing Monitor में Electron Gun केवल आधी लाइन खींचती थी क्योंकि Interlacing Monitor एक समय में केवल आधी लाइन को ही Refresh करता है यह Monitor प्रत्येक Refresh Cycle में दो से अधिक लाईनों को प्रदर्शित कर सकता है इसकी केवल यह कमी थी कि इसका Response time धीमा होता था दोनों प्रकार के Monitor की Resolution क्षमता ( Capacity ) अच्छी होती है परन्तु Non Interlacing Monitor ज्यादा अच्छा होता है 

Bit Mapping : 

पहले जिस Monitor का प्रयोग किया जाता था उसमें केवल Text को  ही Display किया जाता था और इनके Pixel की संख्या सीमित थी जिसमें Text का निर्माण किया जाता था Graphics विकसित करने के लिए जो तकनीक प्रयोग की गईं । जिसमें Text और Graphics दोनों को प्रदर्शित किया जा सकता है वह तकनीक Bit Mapping कहलाती है ।

Video Standard or Display Mode :

Video Standard से तात्पर्य Monitor में लगाये जाने वाले तकनीक से है Personal Computer की  Video तकनीक में दिन प्रतिदिन सुधार आता जा रहा है।अब तक परिचित हुये मानकों में Video Standard के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं ।
  1. Color Graphics Adapter 
  2. Enhanced Graphics Adapter 
  3. Video Graphics Array 
  4. Extended Graphics Array 
  5. Super Video Graphics Array 



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